ट्रंप ने रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों पर लगाया प्रतिबंध, भारत की चुनौती बढ़ी
👉रूसी कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल से अधिकांश तेल खरीदता है भारत
अंतर्राष्ट्रीय खबर
मास्को, रायटर : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर अपनी नीति में बड़ा बदलाव करते हुए रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। इस कारण गुरुवार को वैश्विक तेल की कीमतों में पांच प्रतिशत की वृद्धि हो गई। इस प्रतिबंध से भारत की चुनौती भी बढ़ गई है क्योंकि वह रूस की इन्हीं दो कंपनियों से अधिकांश तेल खरीदता है। भारत औसतन 17 अ लाख बैरल कच्चा तेल प्रतिदिन यू रूस से आयात करता है। अमेरिकी श प्रतिबंध के मद्देनजर अब भारत को रूसी तेल के आयात में कटौती पर विचार करना पड़ेगा। फिलहाल वि भारत सरकार ने अमेरिकी फैसले पर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है। हालांकि निजी क्षेत्र की तेल कंपनी रिलायंस ने कहा है कि वह सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार काम करेगी।रोसनेफ्ट और लुकोइल की वैश्विक तेल उत्पादन में पांच प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी है। इन पर प्रतिबंध ट्रंप का इस मामले में यू-टर्न है क्योंकि पिछले हफ्ते ही उन्होंने कहा था कि वह और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने के लिए जल्द ही बुडापेस्ट में शिखर बैठक करेंगे। लेकिन ट्रंप ने बुधवार को कहा कि शिखर बैठक रद कर दी गई है क्योंकि इससे वांछित परिणाम प्राप्त नहीं होगा, साथ ही शिकायत की किं पुतिन के साथ उनकी कई “अच्छी बातचीत” किसी नतीजे पर नहीं पहुंचीं। रूस की इन दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध के बारे में बताते हुए अमेरिकी वित्त मंत्री स्काट बेसेंट ने स्पष्ट किया कि अमेरिका रूस की उस वित्तीय क्षमता को निशाना बना रहा है जिससे वह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप के सबसे बड़े भू-युद्ध को वित्तपोषित कर रहा है।अमेरिका आगे की कार्रवाई के लिए भी तैयार है। उन्होंने अमेरिका के सहयोगियों देशों से साथ में जुड़ने और इन प्रतिबंधों का पालन करनेका आह्वान किया।यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने नए प्रतिबंधों के लिए अमेरिका का धन्यवाद किया और कहा कि ये बहुत महत्वपूर्ण हैं। साथ ही कहा कि रूस को युद्धविराम के लिए सहमत कराने के लिए उस पर और दबाव बनाने की आवश्यकता होगी। वहीं यूरोपीय यूनियन के नेताओंऔर यूक्रेनी राष्ट्रपति के बीच गुरुवार को ब्रुसेल्स में यूक्रेन के लिए धन जुटाने पर चर्चा हुई। इसमें जब्त रूसी संपत्तियों का उपयोग करके यूक्रेन को 140 अरब यूरो (163 अरब डालर) का ऋण देने पर भी विचार हुआ। इस पर रूस ने कहा कि संपत्तियां जब्त की गई तो वह कड़ा जवाब देगा।
👉ईयू ने भी बढ़ाए प्रतिबंध, तेल-गैस कारोबार पर निशाना
ब्रसेल्स, एपी : गुरुवार को अमेरिकी प्रतिबंधों की घोषणा होते ही यूरोपीय संघ ने रूस पर प्रतिबंध बढ़ा दिए। रूस ने पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों को खारिज करते हुए कहा कि इनसे उसके तेल कारोबार पर खास असर नहीं पड़ेगा। – अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) ने – यूक्रेन पर हमले बंद करने के लिए दबाव बढ़ाने की नीयत से रूस पर प्रतिबंध लगाए हैं। पश्चिमी देशों का मानना है कि तेल कारोबार से होने वाली आय से रूस को यूक्रेन युद्ध जारी रखने में मदद मिल रही है। यूरोपीय संघ ने रूस के तेल और गैस पर प्रतिबंधों को बढ़ाया है। उन्होंने तरल प्राकृतिक गैस के आयात पर प्रतिबंधों को बढ़ाते हुए कारोबार में जुटे 100 नए टैंकरों पर प्रतिबंध लगाया है। रूसी तेल-गैस कारोबार से जुड़े कुल 557 टैंकरों पर ईयू का प्रतिबंध लग चुका है। रूस-कारोबार में लेन-देन के लिए जिस ‘क्रिप्टो करेंसी का इस्तेमाल कर रहा है, ताजा प्रतिबंधों में उसे भी निशाने पर लिया गया है।
रूस ने कहा पाबंदियों से उसकी शर्तों में बदलाव नहीं होगा
रूस ने नए अमेरिकी प्रतिबंधों को अनुत्पादक बताया और संकेत दिया कि यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने की उसकी शर्तों में कोई बदलाव नहीं होगा। रूसी शर्तों को यूक्रेन और कई यूरोपीय देश आत्मसमर्पण के समान मानते हैं। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने प्रतिबंध के संभावित प्रभाव के सवाल पर कंधे उचका दिए और कहा कि रूस ने ऐसे प्रतिबंधों के प्रति मजबूत प्रतिरक्षा विकसित कर ली है। रूस का तेल और गैस राजस्व से राजस्व वर्तमान में साल-दर-साल 21 प्रतिशत कम हो गया है, जो उसके बजट का एक-चौथाई हिस्सा है और यूक्रेन युद्ध के लिए नकदी का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है। हालांकि, रूस को राजस्व मुख्य रूप से उत्पादन से होती है, निर्यात से नहीं। लुकोइल के बोर्ड Zero गुरुवार को लाभांश पर चर्चा करनी थी, लेकिन “नई परिस्थितियों के मद्देनजर इसे रद कर दिया गया।
लेन-देन खत्म करने के लिए 21 नवंबर तक का समय
भारतीय तेल उद्योग के सूत्रों ने बताया कि भारतीय रिफाइनरियां अमेरिकी प्रतिबंधों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए रूसी तेल के आयात में भारी कटौती करने के लिए तैयार हैं। पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाने और खरीदारी से परहेज करने के बाद भारत डिस्काउंट पर बेचे जाने वाले समुद्री रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने कंपनियों को रूस से अपने लेनदेन को समाप्त करने के लिए 21 नवंबर तक का समय दिया है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि नए प्रतिबंध रूस को और छूट देने के लिए मजबूर कर सकते हैं।








