भारत से जबरदस्ती व्यापार समझौता नहीं करवा सकता है अमेरिका:गोयल
👉वाणिज्य मंत्री ने कहा भारत किसी दूसरे देश की इच्छा के मुताबिक नहीं करेगा व्यापार समझौता*
👉 जर्मनी में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री बोले हम नहीं बधे हैं समय सीमा से
नई दिल्लीः वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर किसी जल्दी में नहीं है। भारत दूसरे देश की इच्छा के मुताबिक व्यापार समझौता नहीं करने वाला है। जर्मनी में एक कार्यक्रम के दौरान गोयल ने कहा कि व्यापार समझौता आपसी विश्वास का मसला है और लंबे समय की साझेदारी को ध्यान में रखकर व्यापार समझौता किया जाता है। उन्होंने कहा कि हम यूरोपीय यूनियन (ईयू) के साथ भी व्यापार समझौते पर वार्ता कर रहे हैं। अमेरिका के साथ भी व्यापार समझौते को लेकर वार्ता हो रही है, लेकिन वह हमसे किसी निर्धारित समयसीमा में या कनपटी पर बंदूक लगाकर समझौता नहीं करा सकता दूसरी तरफ, वाणिज्य मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि भारत अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के काफी नजदीक है। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते के रास्ते में आने वाले अधिकतम मसलों को सुलझा लिया गया है। अब कुछ मसले ही सुलझाने रह गए हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर बहुत ही सुगम तरीके से बातचीत चल रही है और वार्ता के दौरान कोई नई रुकावट नहीं आ रही है। सभी मुद्दों को वार्ता के दौरान कवर किया जा रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर पांच चरण की वार्ता हो चुकी है। नवंबर में द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण को पूरा करने का दोनों देशों ने लक्ष्य रखा था। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पद संभालने के बाद भारत से बीटीए करने का एलान किया था और उसके बाद दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू हुई थी। वार्ता की प्रगति को देखते हुए नवंबर में बीटीए के पहले चरण के पूरा होने की पूरी उम्मीद की जा रही है। भारत ने अमेरिका से अधिक मात्रा में तेल खरीद का आश्वासन क भारत ने अमेरिका से अधिक कि दिया है और निवेश को लेकर भी क दोनों देशों के बीच वार्ता हुई है। के मक्का और सोयाबीन जैसे कृषि स उत्पाद को किसी अन्य रूप में भारत क में लाने को लेकर भी दोनों देशों के वे बीच बातचीत हुई है। इन मुद्दों के सुलझने के बाद कमोबेश समझौता होने में दिक्कत नहीं होगी। अभी अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत का शुल्क लगा रखा है और अगस्त के आखिर में इस शुल्क के अमल में आने के बाद अमेरिका के बाजार में भारतीय निर्यात में कमी आने लगी है। भारत के बड़े बाजार को देखते हुए अमेरिका भी भारत से जल्द समझौता करना चाहता है। प्रधानमंत्री मोदी के साथ बातचीत को लेकर ट्रंप के बयान से भी ऐसा प्रतीत हो रहा है।
गोयल का कहना है कि व्यापार समझौते को लंबे समय के नजरिये से देखा जाना चाहिए। भारत कभी भी जल्दबाजी में या गुस्से में आकर फैसले नहीं लेता। एक सवाल के जवाब में गोयल ने कहा, “भारत ने कभी भी राष्ट्रीय हितों के अलावा किसी और आधार पर अपने दोस्तों का चुनाव नहीं किया है। अगर कोई मुझसे कहता है कि आप ईयू के दोस्त नहीं रह सकते, तो मैं यह स्वीकार नहीं करूंगा या कल अगर कोई मुझसे कहता है कि मैं केन्या के साथ काम नहीं कर सकता, तो यह स्वीकार्य नहीं है।” वाणिज्य मंत्री ने कहा कि किसी देश से कोई खास उत्पाद खरीदने का फैसला पूरी दुनिया को मिलकर लेना होगा। उन्होंने कहा, “मैं आज अखबार में पढ़ रहा था कि जर्मनी तेल पर अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट मांग रहा है… ब्रिटेन ने पहले ही अमेरिका से तेल खरीदने के लिए छूट हासिल कर ली है… तो फिर भारत को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है।








